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Friday, November 19, 2010

radhe

श्री राधे
          राधा रानी श्याम सुन्दर जी के पवन धाम में इन दिनों कार्तिक मास कि धूम है , कार्तिक मास में कई बड़ी बृज चौरासी कोस कि यात्रा चलती रहती है जो बृज के स्वरूप कि असली पहचान  करवाती है , बृज देखना हो तो इन यात्राओं के साथ एक बार जरूर जाना चाहिए , असली बृज यहाँ के गाँव में वसता है , जो यहाँ कि संस्कृती को सहेजे हुए हैं , जैसे गोकुल , महावन बलदेव  , नंदगाँव , बरसाना ,गहवर वन ,गोवर्धन , भांडीर वन , राधारानी मानसरोवर , पानीगांव ( भागवत में जिसका फणीगाँव के नाम से वर्णन है , जिसके अनुसार कालिया नाग यहीं रहता था  ) आदि हैं जो बृज  कि यात्रा के पड़ावों  में से हैं ,राधा रानी के धाम में लक्ष्मी जी का एक प्राचीन मंदिर "बेलवन "के नाम से है जो यमुना के किनारे वृन्दाबन के दूसरी ओर स्थित है ,राधादामोदर मंदिर में कार्तिक मास में सबसे धूम रहती है क्योंकि  इस मंदिर  में अतिप्राचीन श्री गिरिराज जी की शिला विराजमान है ,जिस की ७ (सात) परिक्रमा करने मात्र से गोवर्धन जी की एक परिक्रमा का पुण्य फल प्राप्त होता हैं 

Tuesday, November 9, 2010

जय श्री राधे
                पिछली बार श्री गोविन्द देव जी के मंदिर के बारे में लिखा था , गोविन्द देव जी का मूल श्री विग्रह आज कल जयपुर में है , जो महल में बने गोविन्द देव मंदिर में विराजमान है , पुराने मंदिर के पीछे कि ओर नया मंदिर बना हुआ है दोनों मंदिर मिल कर अद्भुत रूप में गोविन्द देव कि महिमा बखान करते है ,

Monday, November 1, 2010

राधे राधे 
           बहुत दिनों से लिखना छह कर भी नहीं लिख पा रहा था , आज अवसर मिला है / 
 आज अप को वृन्दाबन के बहुत प्राचीन गोविन्द देव जी के मंदिर के बारें मैं बता रहा हूँ , यह जयपुर  के राजा  मानसिंह ने बनवाया था , ७ मंजिलों वाला यह मंदिर लाल पत्थर का बना था , जिस के ४ मंज़िल मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने गिरा दिए थे , ३ मंज़िलें के साथ आज भी यह वृन्दाबन का सबसे ऊंचा मंदिर है , आज कल इस की देख भाल की जिम्बेबारी  पुरातत्व बिभाग की है , स्थानीय लोगों मैं यह मंदिर भूतों  के मंदिर के नाम से प्रशिद्ध है क्योंकि एक किंवदंती है की प्राचीन कल मैं यह मंदिर एक रात मैं बन कर तेयार हुआ था , राजा मन सिंह ने बाद मैं केवल इस का जीर्णोद्धार करवा था