श्री राधे
बहुत दिनों से कोई बात नहीं हुई , परन्तु आज कुछ कहने का मन है ,
होली जो पूरे विश्व में विभिन्न रूपों में मनाई जाती है पर भारत में इसका खास रंग है , भारत में भी बृज में होली का खास महत्त्व है , भगवान कृष्ण बृज में बृज वासियों के साथ होली खेलते थे , बृज की होली के बारे में कहावत है की " जग होरी ,बृज होरा"
बृज में होली 48 दिन खेली जाती है , माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी ) से चैत्र कृष्ण अष्टमी तक खेली जाने वाली होली में फागुन शुक्ल अष्टमी से ( बरसाने की लठ्ठ मार होली ) से लेकर अगले दिन नवमी को नन्द गाँव की होली , एकादशी को वृन्दावन में सारे मंदिरों में होली तथा विशेष रूप से बनके बिहारी जी की टेशू के फूलों के रंग से , राधाबल्लभ जी की होली की सवारी , पागल बाबा की होली की सवारी आदि उल्लेखनीय हैं , साथ ही कृष्ण जन्म स्थान पर हुरंगा , होलिका दहन के दिन फालैन में पंडा ( प्रह्लाद के स्वरुप ) का जलती होली से निकलना भी प्रमुख आयोजन है
अगले दिन सारे देश के साथ धूल (धुलेडी) की धूम केबाद भी तृतीया को को बलदेव ( दाउजी) में हुरंगा की भी अपनी शान है , होली का अंतिम आयोजन उत्तरभारत के सबसे विशाल रंगनाथ मंदिर की चैत्र शुक्ल अष्टमी को निकलने वाली होली की सवारी होती है
जय श्री राधे
बहुत दिनों से कोई बात नहीं हुई , परन्तु आज कुछ कहने का मन है ,
होली जो पूरे विश्व में विभिन्न रूपों में मनाई जाती है पर भारत में इसका खास रंग है , भारत में भी बृज में होली का खास महत्त्व है , भगवान कृष्ण बृज में बृज वासियों के साथ होली खेलते थे , बृज की होली के बारे में कहावत है की " जग होरी ,बृज होरा"
बृज में होली 48 दिन खेली जाती है , माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी ) से चैत्र कृष्ण अष्टमी तक खेली जाने वाली होली में फागुन शुक्ल अष्टमी से ( बरसाने की लठ्ठ मार होली ) से लेकर अगले दिन नवमी को नन्द गाँव की होली , एकादशी को वृन्दावन में सारे मंदिरों में होली तथा विशेष रूप से बनके बिहारी जी की टेशू के फूलों के रंग से , राधाबल्लभ जी की होली की सवारी , पागल बाबा की होली की सवारी आदि उल्लेखनीय हैं , साथ ही कृष्ण जन्म स्थान पर हुरंगा , होलिका दहन के दिन फालैन में पंडा ( प्रह्लाद के स्वरुप ) का जलती होली से निकलना भी प्रमुख आयोजन है
अगले दिन सारे देश के साथ धूल (धुलेडी) की धूम केबाद भी तृतीया को को बलदेव ( दाउजी) में हुरंगा की भी अपनी शान है , होली का अंतिम आयोजन उत्तरभारत के सबसे विशाल रंगनाथ मंदिर की चैत्र शुक्ल अष्टमी को निकलने वाली होली की सवारी होती है
जय श्री राधे
