वृंदावन का सबसे प्राचीन मंदिर मदन मोहन जी जो कि सन1592
में मुल्तान निवासी रामदास कपूर ने निर्माण कराया।आजकल यह पुरातत्व विभाग के अधीन है।
चैतन्य महाप्रभु के छै प्रमुख शिष्यों में से सनातन गोस्वामी की सेवा में यह मंदिर बना।सन्1670 में इसे औरंगजेब के द्वारा तोड़ा गया।बाद में पुनर्निर्माण राजा गुणानंद ने कराया।
कहानी बड़ी रोचक है कृष्ण का काल लगभग 5000 साल का है।उनके बाद उनके प्रपौत्र बज्रनाभ ने ब्रज की धरोहरों को सुरक्षित किया।
लेकिन बाद में मुस्लिम आक्रान्ताओं ने तहस नहस कर दिया।उसी दौरान की यह मूर्ति जमीन में अद्वैत टीले के नीचे दबी पड़ी थी।स्वप्न हुआ तो इसे फिर स्थापित किया गया।
उस समय नावों से व्यापार चलता था बताते हैं रामदास कपूर की नाव यमुना में फँस गई जिसे भगवान के रूप में किसी बालक ने धक्का देकर निकाल दिया खुश होकर सेठ ने यह मंदिर बनबाया बाद में अकबर ने काफी जमीन ठाकुर के अस्तित्व में कर दी।फिर अन्य बादशाहों ने आतंक किया तो मूर्ति करौली में मदनमोहन जी के रूप में स्थापित कर दी।
इस मंदिर पर एक स्वर्ण कलश था राजा गुणानंद को मदनमोहन की सुरक्षा पर गर्व था। माँट गाँव का एक चोर था जिसने कलश उतारकर ले जाने की चेतावनी दी नीचे यमुना बहती थी।वह एक एक कील घंटे की चोट पर गाड़ता गया तथा कलश को लेकर यमुना में कूद गया।बाद में राजा ने उसे इनाम भी दिया।
में मुल्तान निवासी रामदास कपूर ने निर्माण कराया।आजकल यह पुरातत्व विभाग के अधीन है।
चैतन्य महाप्रभु के छै प्रमुख शिष्यों में से सनातन गोस्वामी की सेवा में यह मंदिर बना।सन्1670 में इसे औरंगजेब के द्वारा तोड़ा गया।बाद में पुनर्निर्माण राजा गुणानंद ने कराया।
कहानी बड़ी रोचक है कृष्ण का काल लगभग 5000 साल का है।उनके बाद उनके प्रपौत्र बज्रनाभ ने ब्रज की धरोहरों को सुरक्षित किया।
लेकिन बाद में मुस्लिम आक्रान्ताओं ने तहस नहस कर दिया।उसी दौरान की यह मूर्ति जमीन में अद्वैत टीले के नीचे दबी पड़ी थी।स्वप्न हुआ तो इसे फिर स्थापित किया गया।
उस समय नावों से व्यापार चलता था बताते हैं रामदास कपूर की नाव यमुना में फँस गई जिसे भगवान के रूप में किसी बालक ने धक्का देकर निकाल दिया खुश होकर सेठ ने यह मंदिर बनबाया बाद में अकबर ने काफी जमीन ठाकुर के अस्तित्व में कर दी।फिर अन्य बादशाहों ने आतंक किया तो मूर्ति करौली में मदनमोहन जी के रूप में स्थापित कर दी।
इस मंदिर पर एक स्वर्ण कलश था राजा गुणानंद को मदनमोहन की सुरक्षा पर गर्व था। माँट गाँव का एक चोर था जिसने कलश उतारकर ले जाने की चेतावनी दी नीचे यमुना बहती थी।वह एक एक कील घंटे की चोट पर गाड़ता गया तथा कलश को लेकर यमुना में कूद गया।बाद में राजा ने उसे इनाम भी दिया।

