ब्रज के राजा श्री दाऊ जी महाराज के जन्मोत्सव की बधाई
मथुरा के बलदेव में भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज एवं ब्रज के राजा बलदेव दाऊजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। सुबह चार बजे विशेष अभिषेक और हीरा जवाहरात के साथ श्री दाऊजी महाराज विशेष शृंगार किया जाएगा। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस बार श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
भगवान के कृष्ण अवतार में यदुवंश में बलदेव जी प्रकट हुए। गर्ग संहिता में देवकी के सातवें गर्भ में बलदेव जी का आगमन हुआ। वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी कंस के भय से गोकुल में रहती थी। योग माया ने गर्भ को देवकी के उदर से रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया था।
देवकी का सातवां गर्भ हर्ष और शोक वाला था। पांच दिन बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि स्वाति नक्षत्र बुधवार थी, मध्याह्न के समय, तुला लग्न में पांच ग्रह उच्च थे, रोहिणी के गर्भ से नंद भवन में श्री बलदेव जी अवतरित हुए।
भूमि खोदकर निकाला गया था विग्रह
बलराम जी की विशाल मूर्ति श्रीकृष्ण के पौत्र श्री बज्रनाभ ने पूर्वजों की स्मृति में स्थापित कराई थी। यह मूर्ति द्वापर के बाद भूमिस्थ हो गई थी। मूर्ति पूर्व कुषाण कालीन है। गोकुल में श्रीमद् बल्लभाचार्य पौत्र गोस्वामी गोकुलनाथ जी को बलदेव जी ने स्वप्न दिया कि श्यामा गाय जिस स्थान पर दूध स्रवित करती है, उस भूमि में प्रतिमा है।
भूमि की खोदाई कर विग्रह निकाला। श्री कल्याण देव जी को पूजा-अर्चना का भार सौंपा। तभी से श्री कल्याण देव जी के वंशज पूजा सेवा करते हैं। बलदेव जी का श्री विग्रह आठ फीट ऊंचा, साढ़े तीन फीट चौड़ा श्याम वर्ण है, पीछे शेष नाग सात फनों से युक्त छाया करते हैं। विग्रह नृत्य मुद्रा में है, दाहिना हाथ सिर से ऊपर वरद मुद्रा में है। बायें हाथ में चषक है।


