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Saturday, July 7, 2012

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उपरोक्त लिंक पर वृन्दावन का वो दर्द है जो अनेकों सालों से निवारण की वाट जोह रहा है .........फेस बुक पर मेरी आईडी पर है ....................

Wednesday, July 4, 2012







.................मुड़िया पूर्णिमा..............
.............श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
सप्तकोसीय परिक्रमा मार्ग पर नजर आ रहे भक्त ही भक्त
!! परिक्रमा मार्ग में कई चमत्कार होते साक्षात !!
!! पग-पग समेटे है कृष्ण काल की पौराणिकता !!

गोवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण की जिन लीलाओं को हमने महाकाव्यों में पढ़ा है, विद्वानों से सुना है, गिरिराज परिक्रमा में उन लीलाओं और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं आज भी साक्षात होती हैं। ऐसे में इनके दर्शन मात्र से ही कोटि-कोटि पुण्य लाभ अर्जित होता है।
मुड़िया पूर्णिमा पर गिरिराज जी 21 किलोमीटर परिक्रमा करने की मानो होड़ मच जाती है। इस बीच देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु इस अक्षुण्ण पुण्य को हासिल करने के लिए आते हैं। मार्ग में कई पौराणिक स्थल ऐसे है, जो आज भी कृष्णकालीन युग के करीब नजर आते है। बड़ी परिक्रमा की शुरूआत में ही तलहटी में गिरिराज की परिक्रमा से अनूठा अनुभव हासिल होता है। तलहटी में ही लुक-लुक दाऊजी का प्राचीन मंदिर है। बताया जाता है कि यहां श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ लुका-छुपी का खेल खेलते थे।
यहीं पर सिंदूर शिला और काजल शिला भी है। इन शिलाओं के पत्थर घिसने से लाल रंग निकलता है। किवदंति है भगवान श्रीकृष्ण ने इसी शिला से सिंदूर लेकर राधा जी की मांग में भरा था। यहीं काजल शिला भी है, जिससे राधा जी को काजल लगाया था। यहां दर्शन मात्र से ही पुण्य लाभ अर्जित होता है। तलहटी में ही गिरिराज पर्वत के पत्थरों से घर बनाने की पुरानी परंपरा है। बताया जाता है जो श्रद्धालु सच्चे मन से यहां घर बनाकर जाते है तो प्रभु उनके घर का सपना अवश्य पूरा करते है।
पूंछरी के लौंठा पर हाजिरी लगाये बिना परिक्रमा अधूरी मानी जाती है। यहां से जतीपुरा मुखारबिंद होते हुए बड़ी परिक्रमा समाप्त होती है। इसके बाद राधाकुंड परिक्रमा में मानसी गंगा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है। एक बार नंद बाबा ने इंद्र की बजाय गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी, अर्चना के श्रीकृष्ण जल मांगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से गंगा को प्रकट किया। मन से प्रकट होने के चलते इसका नाम मानसी गंगा पड़ा। परिक्रमा में कुसुम सरोवर पूर्व में कुसुम वन होता था। यहां राधा जी सांझी शृंगार के लिये फूल लेने आती थी। यहां पारस पत्थर गिरने के चलते काई नही लगती है।
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      चित्र परिचय  १- मानसी गंगा प्रवेश द्वार २-सप्त  कोसीय परिक्रमा का द्र्ष्य ३-व ४- रेल व बसों से लौटते श्रद्धालु तथा ५-गोवर्धन परिक्रमा में मानसी गंगा पर स्नान का आनंद लेते श्रद्धालु  

तुलसी के अनमोल गुण
* उल्टी होने की दशा में तुलसी का रस इलायची के चूर्ण के साथ देने से लाभ होता है।
* हैजा की स्थिति में तुलसी के पत्तों को काली मिर्च के साथ पीसकर देना चाहिए।
* तुलसी के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ देने से सिरदर्द में लाभ होता है।
* कान दर्द में तुलसी का रस बहुत फायदेमंद है। कान में दर्द होने पर तुलसी के पत्तों का रस कान में गुनगुना करके डालें।
* बच्चों के लीवर में गड़बड़ी या अमाशय शूल में तुलसी का रस बहुत लाभप्रद है।
* तुलसी के पत्तों का रस अदरक के रस के साथ समान मात्रा में प्रयोग करने से जुकाम व सिरदर्द में आराम मिलता है।
* छोटा घाव होने पर तुलसी के बीजों को पीसकर बांधने से घाव जल्दी भरता है।
* दांत में यदि कीड़ा लग गया हो तो तुलसी के पत्तों का रस तथा कपूर से भींगी रूई प्रभावित स्थान पर रखने से लाभ होता है।
* शरीर के किसी हिस्से में सूजन आने पर तुलसी के पत्तों के रस का लेप करें।
* खांसी होने पर तुलसी के रस का सेवन करने से कफ बहने लगता है और कफ कम बनता है।

Thursday, April 5, 2012

तुलसी , उसके गुण , जय वृन्दा वन अर्थात तुलसी का वन

तुलसी , उसके गुण , जय वृन्दा वन अर्थात तुलसी का वन 
तुलसी रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित करने की क्षमता रखती है।

शरीर के वजन को नियंत्रित रखने हेतु भी तुलसी अत्यंत गुणकारी है। इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का वजन घटता है एवं पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानी तुलसी शरीर का वजन आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती है।

तुलसी के रस की कुछ बूँदों में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आ जाता है।

चाय बनाते समय तुलसी के कुछ पत्ते साथ में उबाल लिए जाएँ तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियों के दर्द में राहत मिलती है।

10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है।

तुलसी के काढ़े में थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सौंठ मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।

दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी की पत्तियाँ चबाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है।

10 ग्राम तुलसी के रस के साथ 5 ग्राम शहद एवं 5 ग्राम पिसी कालीमिर्च का सेवन करने से पाचन शक्ति की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियाँ डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है।

रोजाना सुबह पानी के साथ तुलसी की 5 पत्तियाँ निगलने से कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों एवं दिमाग की कमजोरी से बचा जा सकता है। इससे स्मरण शक्ति को भी मजबूत किया जा सकता है।

4-5 भुने हुए लौंग के साथ तुलसी की पत्ती चूसने से सभी प्रकार की खाँसी से मुक्ति पाई जा सकती है।

तुलसी के रस में खड़ी शक्‍कर मिलाकर पीने से सीने के दर्द एवं खाँसी से मुक्ति पाई जा सकती है।

तुलसी के रस को शरीर के चर्मरोग प्रभावित अंगों पर मालिश करने से दाग, एक्जिमा एवं अन्य चर्मरोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।

तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस के साथ पीस कर पेस्ट बनाकर लगाने से एक्जिमा एवं खुजली के रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।

Monday, April 2, 2012

"जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा ".

एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहां से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी ,वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी जिसे कोई भी ले सकता था .एक कुबड़ा व्यक्ति रोज उस रोटी को ले जाता और वजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बडबडाता "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा ".दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा ,वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बडबडाता "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा ".वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी कि "कितना अजीब व्यक्ति है ,एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है और न जाने क्या क्या बडबडाता रहता है ,मतलब क्या है इसका ".एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली "मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी ".और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में जहर मिला दीया जो वो रोज उसके लिए बनाती थी और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली "हे भगवन मैं ये क्या करने जा रही थी ?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दीया .एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी ,हर रोज कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी लेके "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा " बडबडाता हुआ चला गया इस बात से बिलकुल बेखबर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है .
हर रोज जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था .महीनों से उसकी कोई खबर नहीं थी. शाम को उसके दरवाजे पर एक दस्तक होती है ,वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है ,अपने पुरता को अपने सामने खड़ा देखती है.वह पतला और दुबला हो गया था. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था ,भूख से वह कमजोर हो गया था. जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा, "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ. जब मैं एक मील दूर है, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर. मैं मर गया होता, लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था ,उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लीया,भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे मैंने उससे खाने को कुछ माँगा ,उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि "मैं हर रोज यही खाता हूँ लेकिन आज मुझसे ज्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो " .जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी माँ का चेहरा पिला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाजे का सहारा लीया ,उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था .अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा "

निष्कर्ष ~हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या न हो .अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ शेयर करें ,मैं आपसे शर्त लगाने के लिए तैयार हूँ कि ये बहुत लोगों के जीवन को छुएगी 

Saturday, March 3, 2012

बृज के धार्मिक स्वरुप को होली  चार चाँद लगा देती है  

Monday, February 27, 2012

श्री राधे
            बहुत दिनों से कोई बात नहीं हुई , परन्तु आज कुछ कहने का मन है ,
                  होली जो पूरे विश्व में विभिन्न रूपों में मनाई जाती है पर भारत में इसका खास रंग है , भारत में भी बृज में होली का खास महत्त्व है , भगवान कृष्ण बृज में बृज वासियों के साथ होली खेलते थे , बृज की होली के बारे में कहावत है की " जग होरी ,बृज होरा"
                 बृज में होली 48   दिन  खेली जाती है , माघ शुक्ल  पंचमी (बसंत पंचमी ) से चैत्र कृष्ण अष्टमी तक खेली जाने वाली होली में फागुन शुक्ल अष्टमी से ( बरसाने की लठ्ठ मार होली ) से लेकर अगले दिन नवमी को नन्द गाँव की होली , एकादशी को वृन्दावन में सारे मंदिरों में होली तथा विशेष रूप से बनके बिहारी जी की टेशू के फूलों के रंग से ,  राधाबल्लभ जी की होली की सवारी , पागल बाबा की होली की सवारी आदि उल्लेखनीय हैं , साथ ही कृष्ण जन्म स्थान पर हुरंगा , होलिका दहन के दिन फालैन में पंडा ( प्रह्लाद के स्वरुप ) का जलती होली से निकलना भी प्रमुख आयोजन है 
                   अगले दिन सारे देश के साथ धूल (धुलेडी) की धूम केबाद भी तृतीया को को बलदेव ( दाउजी) में हुरंगा की भी अपनी शान है , होली का अंतिम आयोजन उत्तरभारत के सबसे विशाल रंगनाथ मंदिर की चैत्र शुक्ल अष्टमी को निकलने वाली होली की सवारी होती है
                                                                                      जय श्री राधे   

Tuesday, February 21, 2012

जय श्री राधे
                  बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं , एसा व्यस्तता के कारण हुआ , कुछ जो समय मिला वो फेसबुक की भेंट चढ़ गया पर आज कुछ लिखने का मन है
                 बृज की होरी पूरे संसार मैं प्रसिद्द है, आज का विषय बृज की  होली