Tuesday, March 29, 2022
Monday, March 21, 2022
रँगजी मन्दिर के ब्रह्मोत्सव (रथ के मेले) के अंतर्गत दूसरे दिन प्रातः काल स्वर्ण सूर्य प्रभा पर तथा सायं रजत हंस पर विराजमान होकर भगवान बगीचे में बिहार करने जाते हैं
रँगजी मन्दिर के ब्रह्मोत्सव (रथ के मेले) के अंतर्गत दूसरे दिन प्रातः काल स्वर्ण सूर्य प्रभा पर तथा सायं रजत हंस पर विराजमान होकर भगवान बगीचे में बिहार करने जाते हैं,
Sunday, March 20, 2022
रँगनाथ जी मन्दिर का ब्रह्मोत्सव
उत्तर भारत के सबसे बड़े मन्दिरों में सम्मिलित रँगनाथ जी का मन्दिर वृन्दावन धाम की नाक ऊँची करता है ,चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया से प्रारंभ होने वाला ब्रह्मोत्सव जिसे स्थानीय लोग रथ का मेला भी कहते हैं
प्रथम दिवस भगवान प्रातः सोने की पूर्ण कोठी में विराजमान होकर दर्शन देते हुए मन्दिर के बगीचा तक जाते हैं
Sunday, March 13, 2022
ब्रह्मांड घाट गोकुल महावन
ब्रज चौरासी कोस मंदिर दर्शन 71.
#ब्रह्मांड_घाट
यमुना पार महावन रमन रेती में जब भगवान कृष्ण ने मुख में मिट्टी खाई तो यशोदा माता सहज भाव से उनके मुख से मिट्टी निकालने लगीं जब मुख खोला तो देखकर दंग रह गयी पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया माँ डर गयी यह वही साक्षात स्थान है जो हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित है।
सवामन शालिग्राम
ब्रज चौरासी कोस मंदिर दर्शन श्रंखला 54
मंदिर सवामन शालिग्राम (प्राचीन)
यह मंदिर सन् 1770 में बना हुआ है।रामानुज सम्प्रदाय का यह मंदिर रीवा रियासत के राजा रघुराजसिंह के वंशजों ने बनवाया।ऐसे शालिग्राम विश्वभर में नहीं हैं।रीवा स्टेट के राजा के यहाँ इनकी सेवा होती थी।नैपाल मुक्तिनाथ से कभी रीवा आए थे।ठाकुर प्रेरणा से वृन्दावन मंदिर निर्माण की आज्ञा हुई।श्याम सुंदर मंदिर के सामने लोईबाजार में दिव्य मंदिर का निर्माण हुआ।
प्रथम सेवायत जयराम दास के हाथ में थी सन् 1826 में बालमुकुंद, फिर जनार्दन दास उसके बाद हरिप्रपन्नाचार्य तथा इनकी स्थापना बंगलौर के किसी भक्त द्वारा सवामन सोना तुलादान करके की गयी।वर्तमान में श्री राम आचार्य के आधिपत्य में है।
मंदिर के नीचे लोई बाजार में चौदह दुकानें मंदिर की हैं।जिनसे ठाकुरजी के भोगराग का खर्चा चलता है।
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