सिहंपोर हनुमान जी ब्रज वृंदावन के अति प्राचीन विग्रहो में से एक है| श्रीकृष्ण के प्रपौत्र श्रीवज्रनाभ जी ने अपने प्रपितामह श्रीकृष्ण कि स्मृति में ब्रज में अनेको मंदिरो और विग्रहो कि स्थापना कि | लगभग 480 वर्ष पूर्व श्री रूप गोस्वामीपाद जी ने जब श्री गोविंद देव को प्रकट किया तब उनके साथ हि लगभग 5000वर्ष पूर्व द्वापर युग के हि ये हनुमान जी , योगमाया देवी और श्री वृंदा देवी , बडे दाऊ जी महाराज , और भैरो बाबा के विग्रह भी प्रक्ट हुए |
मुगल काल में यवनों के आक्रमण से बचाने के लिए अधिक्तर विग्रह जयपुर राजस्थान ले जाए गए परन्तु सिंहपौर हनुमान जी और योगमाया देवी आज भी वृंदावन मे श्रीगोविंद देव मंदिर घेरे में हि है | श्री वृंदा देवी ब्रज कि सीमा कामबन (भरतपुर -राजस्थान) तक तो गयी पर उसके बाद बहुत प्रयास करने पर भी वृंदा देवी के विग्रह को कोई वहाँ से न हिला पाया.. वृंदावन छोड के वृंदादेवी कैसे रह सकती थी ? इस भाव से उन्हे वहिं स्थापित कर दिया गया |
इनके अतिरिक्त श्री बडे दाऊजी महाराज अनाज मण्डी वृन्दावन में और गौरानगर कालोनी स्थित गोविन्द कुण्ड टीले पर भैरो बाबा विराजित है |
जब यवन श्री गोविन्द देव का मन्दिर तोड़ने को आये तो अचानक हज़ारों बन्दर आकर यहाँ इकट्ठे हो गये. उन्होंने समस्त यवनों को खदेड़ दिया.किसी की आँखें निकाल डालीं. किसी के कान-नाक काट लिये. काट-काट कर उन सबको यहाँ से भगा दिया. हनुमान जी इस विग्रह से ऐसी भयानक सिंह गर्जना हुई कि यवन डर डर कर भागने लगे , यह सब इन्हीं श्रीहनुमानजी के प्रभाव से हुआ. तभी से इनका नाम 'सिंहपौर श्रीहनुमानजी' प्रसिद्ध हुआ.
हनुमान जयंति के अवसर पर वृनंदावनवासियों का श्री सिहंपौर हनुमान जी के प्रति अटूट श्रृद्धा और प्रेम देखकर मैं गदगद हो गया |
श्री सिहंपौर हनुमान जी महाराज कि जय !
जय जय श्री सीता राम !

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