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Monday, February 21, 2022

गोरे दाऊजी मन्दिर, परिक्रमा मार्ग वृन्दावन

ब्रज चौरासी कोस मंदिर दर्शन 

गोरे दाऊजी मंदिर 

यह ऐतिहासिक मंदिर श्री गोरे दाऊजी महाराज का
राजपुर ग्राम में स्थित सन् 1763 में "जीवाजी राव सिंधिया" राजा द्वारा बनवाया गया था वृन्दावन परिक्रमा में ऊँचे से चबूतरे पर एक बाबा हाथी रखते थे उनका नाम हाथी वाले बाबा कहते थे।
बाद में यह मंदिर अटल बिहारी ठाकुर परिक्रमा मार्ग में पहुँच गया 1950 से 1970 तक हाथी बाबा यहीं रहे।
यह रामानंदी साधु थे उनके पश्चात वैष्णवदास सेवानिष्ठ हुए।भक्तमाल के वक्ता सिद्ध महात्मा बाबा मथुरादास जी यहाँ विराजे।यहाँ सौ दो सौ साधु नित्य बने रहते हैं।यहाँ साधु सेवा निरंतर रहती है।
दाऊजी गोरे रंग की प्रतिमा है इसीलिए यह स्थान गोरे दाऊजी के नाम से प्रसिद्ध है।

Friday, February 18, 2022

कारे दाऊजी, अनाज मंडी ,वृन्दावन

ब्रज चौरासी कोस मंदिर दर्शन श्रंखला 56.

#मंदिर_कारे_दाऊजी

अनाजमंडी वृन्दावन में लगभग 500 वर्ष पुराना दाऊजी का मंदिर रेवती जी के साथ विराजित है।
जिस समय गोविंद देव प्रकट हुए राजा मानसिंह ने मंदिर निर्माण कराया।उससे भी पहिले का यह मंदिर है।मंदिर के दक्षिण में लालबिहारा नाम से जगह है।वहाँ एक तालाब था उसी में औरंगजेब के आक्रमण के समय दाऊजी को छिपाया गया था।औरंगजेब के बाद तालाब से निकालकर गोस्वामी मुरलीधर के पूर्वजों ने सेवा सँभाली।

मुरलीधर के बड़े भाई बिहारीलाल दोनों सेवा करते थे।पीछे मुरलीधर ब्रजेश के पुत्र घासीराम उनके दो पुत्र राधाचरन व हरचरन थे आजकल हरचरन जी के पुत्र विष्णु सेवायत हैं करौली महारानी ने 150 वर्ष पूर्व इनको दान कर दिया।

Tuesday, February 15, 2022

वृन्दावन के ठाकुर

श्री धाम में ठाकुरजी के श्री विग्रह के सम्बंधित जानकारी,

जुगल किशोर मन्दिर, केशीघाट वृन्दावन

ब्रज चौरासी कोस मंदिर दर्शन श्रंखला 

मंदिर युगल किशोर (प्राचीन)

यह मंदिर केशीघाट वृन्दावन के निकट है सन् 1607 में नोनकरण कछवाहा राजपूत ने बनवाया
यह गोपीनाथ मंदिर के निर्माता रायसेन सेखावत का छोटा भाई था।इसमें राधाकृष्ण युगल विराज मान हैं लाल पत्थरों में ऊँचा शिखर युक्त मंदिर बना है।किन्तु वर्तमान में गुम्बद विहीन है।

आजकल यह पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैमंदिर के द्वारा भाग की शिल्पकारी देखते बनती है।गोवर्धन धारी श्री कृष्ण के साथ ग्वाल बाल लठिया टेके हुए हैं।

ब्रजचौरासी कोस में ऐसे अनेक मंदिर हैं जिनमें काफी धन भी खर्च हुआ पर आज न वहाँ यात्री जाते हैं लेकिन दर्शनीय हैं।मेरा उद्देश्य है उनको प्रकाश में लाना किन्तु काल के प्रभाव से ओझल हो चुके हैं।जहाँ सिद्ध संतों का वास रहा है जो ब्रज से प्रभावित होकर यहाँ बसे थे।

कुसुम सरोवर, गोवर्धन पर्वत, मथुरा

ब्रज चौरासी कोस मंदिर दर्शन श्रंखला 51

#कुसुम_सरोवर

यह राधाकुंड से तीन किमी० दूर गोवर्धन परिक्रमा
मार्ग में स्थित है।यहाँ पर किशोरी जी फूलमाला बनाकर स्यामसुंदर को पहनाती हैं।कुंड का नव निर्माण सीढ़ियाँ सन् 1767 में भरतपुर के प्रतापी राजा जवाहर सिंह ने कराया।घाट के पश्चिम दिशा में सूरजमल की छतरी है।दाऊजी का मंदिर और उत्तर दिशा में सूरजमल की छतरी है।उत्तर पश्चिम कोण पर उद्धव जी की बैठक है,पास में नारदकुंड तथा पास में ग्वालियर के राजा का मंदिर बना है।

गोवर्धनाद्दूरेण वृन्दारण्ये सखी स्थले।
प्रवत्त: कुसुमाम्भोषो कृष्ण संकीर्तनोत्सव:।।
(भागवत १०/२/३०)

कुसुम सरोवर ही बज्रनाभ व उनकी माँ ऊषा ने श्री मद्भागवत कथा का श्रवण किया।जो शुकदेव मुनि ने सुनाई।जो उद्धव जी ने परीक्षित को आदेशित किया।

अशोक अज्ञ

बृज दर्शन,ग्वालियर मन्दिर, वृन्दावन

 ब्रज चौरासी कोस मंदिर शृंखला 


मंदिर ग्वालियर "ब्रह्मचारी का" प्राचीन


इस मंदिर का निर्माणकाल सन् 1860 है।गोपेश्वर महादेव के निकट महाराजा जीवाजी राव सिंधिया के पिता ने बनवाया पत्नी राजमाता विजया राजे सिंधिया तथा माधवराव सिंधिया के पिता थे ग्वालियर वालों के द्वारा बनवाया गया मंदिर में मुख्यत: ठाकुर राधागोपाल, हंस गोपाल एवं नृत्यगोपाल विराजित हैं मंदिर में पाँचों निम्बार्काचार्यों की मूर्तियाँ श्री हंस,सनक,नारद,एवं श्री निवास के रूप में दर्शन होते हैं।


राजा सिंधिया के गुरु श्री गिरधारी ब्रह्मचारी जी का मंदिर भी कहते हैं।मंदिर को बनवाकर जीवाजी ने अपने गुरू को अर्पण कर दिया था प्राचीन पच्चीकारी पत्थरों में कलात्मक ढंग की ऊँची सीढ़ियाँ देखने लायक हैं।


गिरधारी शरण जी को वाक्य सिद्धी थी बाद में गुरूजी ने रुष्ट होकर मंदिर छोड़ दिया बाद में छटीकरा के रास्ते गोपालगढ़ में अपने शिष्यों के साथ रहने लगे।


गिरधारी शरण देव का जन्म सन्1941 में सवाई माधोपुर के पास लसोड़ा ग्राम में हुआ था पिता महोवत राम सनाढ्य ब्राह्मण थे।


घर में बैलगाड़ियों से व्यापार होता था एक दिन बैलगाड़ी से जा रहे थे रास्ते में सिंह ने आक्रमण कर बैल को मार दिया इन पर कायरता का आरोप मढ़ते हुए भाभी ने डूब मरने को कहा।झोझा नामक झील में आत्महत्या करने के लिए डूबे लोगों ने बचा लिया।झील में सालिग्राम की एक मूर्ति मिली उसे ही लेकर वृन्दावन आ गये गुरू आदेश से तपस्या की तो वाक्यसिद्धि हो गयी उसी का चमत्कार जीवाजी ने देखा तो मंदिर इनको बनवाकर दिया।