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Tuesday, August 17, 2010

आज़ादी कैसी जो किसानो को गोली दे ,लाठी दे

राधे राधे , आज़ादी के दिन मथुरा ,अली गढ़ ,आगरा के किसानो पर जो मायावती सर्कार का कहर टूटा है उससे धार्मिक विषय पर लिखने वाला मेरे जैसा व्यक्ति दुखी हो कर राजनीत के घ्रणित विषय पर लिख रहा है ,दिल्ली मैं बेठी गूंगी बहरी सरकार को इस मैं कोई बुराईनहीं नजर नहीं आती , हो हल्ला मचने वाले दल अपना चेहरा आईने मै देखें ,जब वो सत्ता मैं थे तब भी ऐसे हादसे हुए हैं । देश मैं अनेकों बार इस प्रकार कि घटना हो चुकी है चाहे वो सिंगूर हो ,दादरी हो या कही और , फिर भी कितने सालों से भूमि अदिग्रहण का कानून संसद मैं धुल के गुबारों मैं दबकर रह गया , उसकी यद् राजनेतिक दलों को तब आती हैं जब कोई इस प्रकार कि घटना होती है ,जिसे घटना कि भांति ही कुछ दिनों मैं भुला दिया जायेगा ,पर किसानों की किसीको चिंता नहीं है ।

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