Tuesday, September 27, 2022
टेसू , झांझी उत्तर भारत की परंपरा
कुसुम सरोवर, गोवर्धन पर्वत, मथुरा
Thursday, May 12, 2022
मोहिनी एकादशी
Tuesday, March 29, 2022
Monday, March 21, 2022
रँगजी मन्दिर के ब्रह्मोत्सव (रथ के मेले) के अंतर्गत दूसरे दिन प्रातः काल स्वर्ण सूर्य प्रभा पर तथा सायं रजत हंस पर विराजमान होकर भगवान बगीचे में बिहार करने जाते हैं
Sunday, March 20, 2022
रँगनाथ जी मन्दिर का ब्रह्मोत्सव
Sunday, March 13, 2022
ब्रह्मांड घाट गोकुल महावन
सवामन शालिग्राम
Monday, February 21, 2022
गोरे दाऊजी मन्दिर, परिक्रमा मार्ग वृन्दावन
Friday, February 18, 2022
कारे दाऊजी, अनाज मंडी ,वृन्दावन
Tuesday, February 15, 2022
जुगल किशोर मन्दिर, केशीघाट वृन्दावन
कुसुम सरोवर, गोवर्धन पर्वत, मथुरा
बृज दर्शन,ग्वालियर मन्दिर, वृन्दावन
ब्रज चौरासी कोस मंदिर शृंखला
मंदिर ग्वालियर "ब्रह्मचारी का" प्राचीन
इस मंदिर का निर्माणकाल सन् 1860 है।गोपेश्वर महादेव के निकट महाराजा जीवाजी राव सिंधिया के पिता ने बनवाया पत्नी राजमाता विजया राजे सिंधिया तथा माधवराव सिंधिया के पिता थे ग्वालियर वालों के द्वारा बनवाया गया मंदिर में मुख्यत: ठाकुर राधागोपाल, हंस गोपाल एवं नृत्यगोपाल विराजित हैं मंदिर में पाँचों निम्बार्काचार्यों की मूर्तियाँ श्री हंस,सनक,नारद,एवं श्री निवास के रूप में दर्शन होते हैं।
राजा सिंधिया के गुरु श्री गिरधारी ब्रह्मचारी जी का मंदिर भी कहते हैं।मंदिर को बनवाकर जीवाजी ने अपने गुरू को अर्पण कर दिया था प्राचीन पच्चीकारी पत्थरों में कलात्मक ढंग की ऊँची सीढ़ियाँ देखने लायक हैं।
गिरधारी शरण जी को वाक्य सिद्धी थी बाद में गुरूजी ने रुष्ट होकर मंदिर छोड़ दिया बाद में छटीकरा के रास्ते गोपालगढ़ में अपने शिष्यों के साथ रहने लगे।
गिरधारी शरण देव का जन्म सन्1941 में सवाई माधोपुर के पास लसोड़ा ग्राम में हुआ था पिता महोवत राम सनाढ्य ब्राह्मण थे।
घर में बैलगाड़ियों से व्यापार होता था एक दिन बैलगाड़ी से जा रहे थे रास्ते में सिंह ने आक्रमण कर बैल को मार दिया इन पर कायरता का आरोप मढ़ते हुए भाभी ने डूब मरने को कहा।झोझा नामक झील में आत्महत्या करने के लिए डूबे लोगों ने बचा लिया।झील में सालिग्राम की एक मूर्ति मिली उसे ही लेकर वृन्दावन आ गये गुरू आदेश से तपस्या की तो वाक्यसिद्धि हो गयी उसी का चमत्कार जीवाजी ने देखा तो मंदिर इनको बनवाकर दिया।
