Tuesday, April 11, 2023
टटिया स्थान
Friday, April 7, 2023
हनुमानजी का विशिष्ट मन्दिर
Tuesday, March 28, 2023
श्री हिंगलाज माता मन्दिर
Monday, March 27, 2023
षष्ठम माँ कात्यायनी
Tuesday, September 27, 2022
टेसू , झांझी उत्तर भारत की परंपरा
कुसुम सरोवर, गोवर्धन पर्वत, मथुरा
Thursday, May 12, 2022
मोहिनी एकादशी
Tuesday, March 29, 2022
Monday, March 21, 2022
रँगजी मन्दिर के ब्रह्मोत्सव (रथ के मेले) के अंतर्गत दूसरे दिन प्रातः काल स्वर्ण सूर्य प्रभा पर तथा सायं रजत हंस पर विराजमान होकर भगवान बगीचे में बिहार करने जाते हैं
Sunday, March 20, 2022
रँगनाथ जी मन्दिर का ब्रह्मोत्सव
Sunday, March 13, 2022
ब्रह्मांड घाट गोकुल महावन
सवामन शालिग्राम
Monday, February 21, 2022
गोरे दाऊजी मन्दिर, परिक्रमा मार्ग वृन्दावन
Friday, February 18, 2022
कारे दाऊजी, अनाज मंडी ,वृन्दावन
Tuesday, February 15, 2022
जुगल किशोर मन्दिर, केशीघाट वृन्दावन
कुसुम सरोवर, गोवर्धन पर्वत, मथुरा
बृज दर्शन,ग्वालियर मन्दिर, वृन्दावन
ब्रज चौरासी कोस मंदिर शृंखला
मंदिर ग्वालियर "ब्रह्मचारी का" प्राचीन
इस मंदिर का निर्माणकाल सन् 1860 है।गोपेश्वर महादेव के निकट महाराजा जीवाजी राव सिंधिया के पिता ने बनवाया पत्नी राजमाता विजया राजे सिंधिया तथा माधवराव सिंधिया के पिता थे ग्वालियर वालों के द्वारा बनवाया गया मंदिर में मुख्यत: ठाकुर राधागोपाल, हंस गोपाल एवं नृत्यगोपाल विराजित हैं मंदिर में पाँचों निम्बार्काचार्यों की मूर्तियाँ श्री हंस,सनक,नारद,एवं श्री निवास के रूप में दर्शन होते हैं।
राजा सिंधिया के गुरु श्री गिरधारी ब्रह्मचारी जी का मंदिर भी कहते हैं।मंदिर को बनवाकर जीवाजी ने अपने गुरू को अर्पण कर दिया था प्राचीन पच्चीकारी पत्थरों में कलात्मक ढंग की ऊँची सीढ़ियाँ देखने लायक हैं।
गिरधारी शरण जी को वाक्य सिद्धी थी बाद में गुरूजी ने रुष्ट होकर मंदिर छोड़ दिया बाद में छटीकरा के रास्ते गोपालगढ़ में अपने शिष्यों के साथ रहने लगे।
गिरधारी शरण देव का जन्म सन्1941 में सवाई माधोपुर के पास लसोड़ा ग्राम में हुआ था पिता महोवत राम सनाढ्य ब्राह्मण थे।
घर में बैलगाड़ियों से व्यापार होता था एक दिन बैलगाड़ी से जा रहे थे रास्ते में सिंह ने आक्रमण कर बैल को मार दिया इन पर कायरता का आरोप मढ़ते हुए भाभी ने डूब मरने को कहा।झोझा नामक झील में आत्महत्या करने के लिए डूबे लोगों ने बचा लिया।झील में सालिग्राम की एक मूर्ति मिली उसे ही लेकर वृन्दावन आ गये गुरू आदेश से तपस्या की तो वाक्यसिद्धि हो गयी उसी का चमत्कार जीवाजी ने देखा तो मंदिर इनको बनवाकर दिया।
Sunday, September 12, 2021
बल्देव छट
ब्रज के राजा श्री दाऊ जी महाराज के जन्मोत्सव की बधाई
मथुरा के बलदेव में भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज एवं ब्रज के राजा बलदेव दाऊजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। सुबह चार बजे विशेष अभिषेक और हीरा जवाहरात के साथ श्री दाऊजी महाराज विशेष शृंगार किया जाएगा। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस बार श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
भगवान के कृष्ण अवतार में यदुवंश में बलदेव जी प्रकट हुए। गर्ग संहिता में देवकी के सातवें गर्भ में बलदेव जी का आगमन हुआ। वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी कंस के भय से गोकुल में रहती थी। योग माया ने गर्भ को देवकी के उदर से रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया था।
देवकी का सातवां गर्भ हर्ष और शोक वाला था। पांच दिन बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि स्वाति नक्षत्र बुधवार थी, मध्याह्न के समय, तुला लग्न में पांच ग्रह उच्च थे, रोहिणी के गर्भ से नंद भवन में श्री बलदेव जी अवतरित हुए।
भूमि खोदकर निकाला गया था विग्रह
बलराम जी की विशाल मूर्ति श्रीकृष्ण के पौत्र श्री बज्रनाभ ने पूर्वजों की स्मृति में स्थापित कराई थी। यह मूर्ति द्वापर के बाद भूमिस्थ हो गई थी। मूर्ति पूर्व कुषाण कालीन है। गोकुल में श्रीमद् बल्लभाचार्य पौत्र गोस्वामी गोकुलनाथ जी को बलदेव जी ने स्वप्न दिया कि श्यामा गाय जिस स्थान पर दूध स्रवित करती है, उस भूमि में प्रतिमा है।
भूमि की खोदाई कर विग्रह निकाला। श्री कल्याण देव जी को पूजा-अर्चना का भार सौंपा। तभी से श्री कल्याण देव जी के वंशज पूजा सेवा करते हैं। बलदेव जी का श्री विग्रह आठ फीट ऊंचा, साढ़े तीन फीट चौड़ा श्याम वर्ण है, पीछे शेष नाग सात फनों से युक्त छाया करते हैं। विग्रह नृत्य मुद्रा में है, दाहिना हाथ सिर से ऊपर वरद मुद्रा में है। बायें हाथ में चषक है।


